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एयरटेल के 36 करोड़ ग्राहकों को मुफ्त Perplexity: क्या भारत में यह दांव काम कर गया

tech2026-08-18 · 3 min read · 379 reads

Perplexity ने भारती एयरटेल के करीब 36 करोड़ ग्राहकों को अपना प्रीमियम प्लान मुफ्त बांटा. अब जब यह ऑफर खत्म हो रहा है, ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि इस बड़े प्रयोग से कंपनी को असल में क्या मिला.

भारत बीते एक साल में एआई कंपनियों के लिए दुनिया की सबसे बड़ी प्रयोगशालाओं में से एक बन गया है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण है Perplexity, जिसने अपने प्रीमियम प्लान Perplexity Pro को देश की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल के करीब 36 करोड़ ग्राहकों को पूरी तरह मुफ्त में बांट दिया.

यह पेशकश मामूली नहीं थी. आमतौर पर करीब 200 डॉलर सालाना में मिलने वाला Perplexity Pro, एयरटेल यूज़र्स को पूरे 12 महीनों के लिए मुफ्त दिया गया. नए ग्राहकों के लिए इस ऑफर को भुनाने की आखिरी तारीख 16 जनवरी 2026 थी, जबकि सबसे पुराने उपयोगकर्ताओं के लिए मुफ्त पहुंच जुलाई 2026 से समाप्त होने लगी.

डाउनलोड का सैलाब

इस रणनीति का सबसे तात्कालिक असर डाउनलोड के आंकड़ों में दिखा. जुलाई 2025 में अकेले करीब 59 लाख बार ऐप डाउनलोड हुआ, जो पिछले महीने से 625 प्रतिशत की भारी उछाल थी. ऑफर की सात महीने की अवधि में कुल करीब 5.6 करोड़ डाउनलोड हुए, जो पिछले सात महीनों की तुलना में नौ गुना अधिक थे.

जैसे ही मुफ्त पेशकश का असर कम हुआ, पूरी तस्वीर बदल गई. फरवरी से जुलाई 2026 के बीच डाउनलोड घटकर केवल करीब 33 लाख रह गए, यानी पहले की तुलना में लगभग 90 प्रतिशत की गिरावट. यह साफ दिखाता है कि इतनी तेज़ बढ़त का बड़ा हिस्सा मुफ्त ऑफर पर ही टिका हुआ था.

कितने उपयोगकर्ता टिके रहे

भारत में स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं का विशाल आधार एआई कंपनियों के लिए सबसे बड़ा मैदान बन गया है.
भारत में स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं का विशाल आधार एआई कंपनियों के लिए सबसे बड़ा मैदान बन गया है.

असली सवाल यह था कि मुफ्त पहुंच खत्म होने के बाद कितने लोग ऐप पर बने रहते हैं. अक्टूबर 2025 में कंपनी के मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता करीब 2.2 करोड़ के शिखर पर पहुंचे थे. जुलाई 2026 में यह संख्या घटकर लगभग 1.4 करोड़ रह गई, जो शिखर से करीब 37 प्रतिशत कम है.

फिर भी इस गिरावट को पूरी तरह नकारात्मक नहीं कहा जा सकता. जुलाई 2026 के करीब 1.4 करोड़ मासिक उपयोगकर्ता, 2025 की पहली छमाही के औसत करीब 26 लाख उपयोगकर्ताओं से पांच गुना अधिक हैं. यानी इस पूरे प्रयोग के बाद भी कंपनी का उपयोगकर्ता आधार पहले से कहीं बड़ा हो चुका है.

राजस्व, जहां असली परीक्षा है

कंपनी के लिए सबसे उत्साहजनक संकेत राजस्व से आए. फरवरी से मध्य अगस्त 2026 के बीच, एयरटेल ऑफर की अवधि की तुलना में भारत में Perplexity का राजस्व करीब 60 प्रतिशत बढ़ा. इसका मतलब है कि मुफ्त पहुंच खत्म होने के बावजूद, भुगतान करने वाले उपयोगकर्ताओं की संख्या घटने के बजाय बढ़ती दिखी.

छोटी अवधि के आंकड़े भी यही कहानी कहते हैं. 18 जुलाई से 12 अगस्त 2026 के बीच, भारत में ऐप के भीतर होने वाली दैनिक खरीद से राजस्व पिछले 30 दिनों की तुलना में 9 प्रतिशत और 2026 की पहली छमाही के औसत से 27 प्रतिशत अधिक रहा. मासिक शुद्ध मोबाइल राजस्व जनवरी 2025 के करीब 34 हज़ार डॉलर से बढ़कर जुलाई 2026 में लगभग 1.56 लाख डॉलर तक पहुंच गया.

विश्लेषक इस नतीजे को संतुलित नज़र से देख रहे हैं. सेंसर टावर के अबे यूसुफ के अनुसार, इस तरह के समयबद्ध प्रचार के बाद अपनाव में गिरावट आना स्वाभाविक था, लेकिन इसके बावजूद लगातार इस्तेमाल टिका हुआ है. यही टिकाऊपन कंपनी के लिए सबसे अहम संकेत माना जा रहा है.

भारत इतना अहम क्यों है

Perplexity का यह दांव भारत की बदलती अहमियत को भी दिखाता है. दुनिया की सबसे बड़ी आबादी और तेज़ी से बढ़ते स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के साथ, भारत एआई कंपनियों के लिए उपयोगकर्ता जुटाने का सबसे बड़ा मैदान बन गया है. यहां जल्दी पैर जमाना अब लगभग हर वैश्विक कंपनी की रणनीति का हिस्सा है.

हालांकि रास्ता उतना आसान नहीं है. भारतीय बाज़ार में उपयोगकर्ता तो तेज़ी से जुड़ जाते हैं, पर उन्हें भुगतान करने वाले ग्राहकों में बदलना बड़ी चुनौती है, क्योंकि यहां कीमत को लेकर संवेदनशीलता कहीं अधिक है. मुफ्त से भुगतान की ओर यही छलांग किसी भी कंपनी की असली परीक्षा होती है.

आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि Perplexity इन करोड़ों उपयोगकर्ताओं में से कितनों को स्थायी और भुगतान करने वाले ग्राहकों में बदल पाती है. फ़िलहाल, एयरटेल के साथ यह प्रयोग इस बहस को और तेज़ करता है कि क्या मुफ्त पहुंच के दम पर बना विशाल पैमाना सचमुच एक टिकाऊ कारोबार में बदल सकता है.

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