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भारत की संप्रभु एआई की ओर बड़ी छलांग: इंडियाएआई मिशन और सर्वम के स्वदेशी मॉडल

tech2026-08-20 · 4 min read · 2 reads

भारत 2026 में संप्रभु एआई की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इंडियाएआई मिशन के तहत 34,000 जीपीयू तैनात किए गए हैं और सर्वम एआई ने स्वदेशी भाषा मॉडल पेश किए हैं।

भारत वर्ष 2026 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं और स्वदेशी कंपनियों के प्रयासों से देश अब संप्रभु एआई के निर्माण की ओर बड़े कदम उठा रहा है, जो तकनीकी क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

इंडियाएआई मिशन की नींव

भारत इंडियाएआई मिशन और स्वदेशी मॉडलों के जरिए संप्रभु एआई की दिशा में आगे बढ़ रहा है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
भारत इंडियाएआई मिशन और स्वदेशी मॉडलों के जरिए संप्रभु एआई की दिशा में आगे बढ़ रहा है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

इस पूरे प्रयास का केंद्र इंडियाएआई मिशन है, जिसे मार्च 2024 में मंजूरी दी गई थी। इस मिशन के लिए कुल 10,371.92 करोड़ रुपये, यानी लगभग 1.25 अरब डॉलर का बजट निर्धारित किया गया है। यह मिशन सात प्रमुख स्तंभों पर आधारित है, जो एआई के विभिन्न पहलुओं को व्यापक रूप से कवर करते हैं।

इन सात स्तंभों में एआई कंप्यूट, फाउंडेशन मॉडल, डेटासेट, एप्लिकेशन विकास, एआई सुरक्षा, स्टार्टअप सहायता और कौशल विकास शामिल हैं। इस व्यापक दृष्टिकोण का मुख्य उद्देश्य देश में एक संपूर्ण एआई पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है, जो अनुसंधान से लेकर व्यावहारिक उपयोग तक फैला हुआ हो।

जीपीयू और कंप्यूट शक्ति

एआई के विकास के लिए सबसे जरूरी संसाधनों में से एक शक्तिशाली कंप्यूटिंग क्षमता है। इंडियाएआई मिशन के तहत अब तक लगभग 34,000 जीपीयू तैनात किए जा चुके हैं, जिनमें एनवीडिया के एच100, एच200 और ब्लैकवेल जैसे उन्नत चिप शामिल हैं। ये संसाधन स्टार्टअप और शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराए गए हैं।

इन जीपीयू तक पहुंच को किफायती बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सामान्य जीपीयू के लिए प्रति घंटे लगभग 115.85 रुपये और उच्च क्षमता वाले जीपीयू के लिए 150 रुपये का शुल्क रखा गया है। पात्र परियोजनाओं को इस पर 40 प्रतिशत की अतिरिक्त सब्सिडी भी प्रदान की जाती है।

सरकार का लक्ष्य इस क्षमता को और अधिक बढ़ाना है। योजना के अनुसार, वर्ष 2026 के अंत तक सार्वजनिक जीपीयू की संख्या को बढ़ाकर एक लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इन संसाधनों तक पहुंच मुख्य रूप से शैक्षणिक संस्थानों, छोटे उद्यमों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप को प्राथमिकता के आधार पर दी जाती है।

सर्वम एआई का स्वदेशी मॉडल

स्वदेशी एआई मॉडल के निर्माण में सर्वम एआई नामक कंपनी सबसे आगे है। इस कंपनी की स्थापना अगस्त 2023 में बेंगलुरु में हुई थी, और इसके संस्थापक विवेक राघवन तथा प्रत्यूष कुमार हैं, जो आईआईटी मद्रास से जुड़े रहे हैं। सरकार ने इसे अप्रैल 2025 में कुल 67 आवेदकों में से चुना था।

फरवरी 2026 में सर्वम एआई ने दो महत्वपूर्ण ओपन-सोर्स मॉडल पेश किए। इनमें से एक सर्वम-30बी है, जिसमें 30 अरब पैरामीटर और 32 हजार टोकन का कॉन्टेक्स्ट विंडो है। दूसरा मॉडल सर्वम-105बी है, जिसे इंडस भी कहा जाता है, और इसमें 105 अरब पैरामीटर तथा 1 लाख 28 हजार टोकन का कॉन्टेक्स्ट विंडो मौजूद है।

इन मॉडलों को 18 फरवरी 2026 को अपाचे 2.0 लाइसेंस के तहत ओपन-सोर्स के रूप में जारी किया गया। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये भारत की 22 आधिकारिक भाषाओं का समर्थन करते हैं। इन मॉडलों को कुल मिलाकर 16 ट्रिलियन टोकन के विशाल डेटा पर प्रशिक्षित किया गया है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।

राष्ट्रीय स्तर पर अनावरण

सर्वम के इन मॉडलों का सार्वजनिक अनावरण नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में किया गया। इस भव्य आयोजन में वैश्विक तकनीकी जगत की कई बड़ी हस्तियां मौजूद रहीं, जिनमें गूगल के सुंदर पिचाई, ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के डारियो अमोदेई जैसे प्रमुख नाम शामिल थे।

सरकार की ओर से सर्वम एआई को महत्वपूर्ण सहायता भी प्रदान की गई है। कंपनी को योट्टा डेटा सर्विसेज के माध्यम से एनवीडिया के 4,096 एच100 जीपीयू उपलब्ध कराए गए हैं, जिसके लिए लगभग 99 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई है। यह सहायता स्वदेशी मॉडल के प्रशिक्षण में एक अहम भूमिका निभा रही है।

चिप निर्माण की चुनौती

हालांकि, भारत के इस पूरे एआई पारिस्थितिकी तंत्र के सामने एक बड़ी चुनौती भी मौजूद है। यह पूरा तंत्र मुख्य रूप से एनवीडिया की चिप पर निर्भर है, और भारत के पास अभी तक अपना कोई घरेलू स्तर पर डिजाइन या निर्मित एआई एक्सेलेरेटर नहीं है। यह निर्भरता एक बड़ा रणनीतिक जोखिम मानी जा रही है।

इस चुनौती से निपटने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। ओला के भाविश अग्रवाल की कंपनी कृत्रिम इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है और अपना बोधि नामक एआई एक्सेलेरेटर चिप विकसित कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक जीपीयू आयात पर भारत की निर्भरता को कम करना है, जो दीर्घकाल में बेहद महत्वपूर्ण है।

आगे की राह

कुल मिलाकर, वर्ष 2026 भारत के लिए संप्रभु एआई की दिशा में एक निर्णायक वर्ष साबित हो रहा है। सरकारी निवेश, स्वदेशी मॉडल, किफायती कंप्यूट और भाषाई विविधता पर ध्यान देकर भारत इस क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बना रहा है। हालांकि चिप निर्माण जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, जिन्हें आने वाले समय में हल करना जरूरी होगा।

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