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भारत में एआई की धूम: कर्मचारियों से लेकर कंपनियों तक, बदल रहा है काम का तरीका

tech2026-08-20 · 3 min read · 1 reads

दो रिपोर्टों के अनुसार, भारत में एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। 90 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी जेनरेटिव एआई का उपयोग कर रहे हैं, जबकि भारतीय कंपनियां एआई अपनाने में वैश्विक स्तर पर आगे हैं।

भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई का प्रभाव अब केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा है। यह देश के कार्यबल और व्यवसायों के काम करने के तरीके को गहराई से बदल रहा है। हाल में आई दो महत्वपूर्ण रिपोर्टों से पता चलता है कि भारत इस क्षेत्र में तेजी से एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है।

कार्यबल में एआई की पैठ

इनमें से पहली रिपोर्ट इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2026 है, जो इसका 13वां संस्करण है। इसे ईटीएस ने सीआईआई और एआईसीटीई जैसे संगठनों के सहयोग से जारी किया है। इस अध्ययन के लिए 1,00,000 से अधिक उम्मीदवारों का सर्वेक्षण किया गया, जिससे इसके निष्कर्ष काफी व्यापक और विश्वसनीय बन जाते हैं।

रिपोर्ट का सबसे उल्लेखनीय आंकड़ा एआई के व्यापक इस्तेमाल से जुड़ा है। भारत में 90 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी अब अपने रोजमर्रा के काम में जेनरेटिव एआई उपकरणों का उपयोग करने लगे हैं। यह दिखाता है कि यह तकनीक अब आम कामकाजी जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा बन चुकी है।

वैश्विक प्रतिभा का केंद्र

भारत की वैश्विक एआई प्रतिभा पूल में 16 प्रतिशत हिस्सेदारी है, और 2027 तक 12.5 लाख विशेषज्ञ होने का अनुमान है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
भारत की वैश्विक एआई प्रतिभा पूल में 16 प्रतिशत हिस्सेदारी है, और 2027 तक 12.5 लाख विशेषज्ञ होने का अनुमान है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

प्रतिभा के मामले में भी भारत एक अग्रणी स्थान पर है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के कुल एआई प्रतिभा पूल में भारत की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत है। इतना ही नहीं, अनुमान है कि साल 2027 तक देश में एआई विशेषज्ञों की संख्या 12.5 लाख तक पहुंच जाएगी, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि होगी।

रोजगार के मोर्चे पर भी सुधार साफ नजर आता है। देश की समग्र रोजगार क्षमता 2026 में बढ़कर 56.35 प्रतिशत हो गई है, जो पिछले साल के 54.81 प्रतिशत से अधिक है। यह वृद्धि दर्शाती है कि भारतीय युवा बदलते बाजार की मांगों के अनुरूप खुद को लगातार ढाल रहे हैं।

भविष्य की तस्वीर भी उत्साहजनक है। गिग और फ्रीलांस कार्यबल के साल 2030 तक बढ़कर 2.35 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। इसके साथ ही, परियोजना आधारित भर्ती में पिछले एक साल में 38 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो काम के बदलते स्वरूप को साफ दर्शाती है।

कंपनियां अपनाने में सबसे आगे

दूसरी रिपोर्ट डेलॉइट की ओर से आई है, जो 24 मार्च 2026 को प्रकाशित हुई। इसके अनुसार, भारतीय कंपनियां अब प्रयोग के चरण से आगे बढ़ चुकी हैं और बड़े पैमाने पर एआई अपनाने में अपने वैश्विक साथियों से आगे निकल रही हैं। यह भारतीय उद्योग जगत की बढ़ती परिपक्वता को दर्शाता है।

आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं। भारत में 40 प्रतिशत कंपनियों ने एआई के महत्वपूर्ण या पूर्ण उपयोग की बात कही है, जबकि वैश्विक औसत लगभग 28 प्रतिशत ही है। इसके अलावा, 94 प्रतिशत भारतीय संगठनों को उम्मीद है कि आने वाले साल में एआई पर उनका खर्च और अधिक बढ़ेगा।

विभिन्न विभागों में एआई का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। उत्पाद विकास के क्षेत्र में 62 प्रतिशत कंपनियां बड़े पैमाने पर एआई का उपयोग कर रही हैं। इसके बाद रणनीति और संचालन में 56 प्रतिशत, मार्केटिंग और बिक्री में 55 प्रतिशत तथा आपूर्ति श्रृंखला में 48 प्रतिशत कंपनियां इसका लाभ उठा रही हैं।

चुनौतियां और उम्मीदें

हालांकि, इस रास्ते में कुछ चुनौतियां भी मौजूद हैं। एआई को अपनाने में सबसे बड़ी बाधाओं में नियामक और अनुपालन संबंधी आवश्यकताएं शामिल हैं, जिन्हें 39 प्रतिशत कंपनियों ने चुनौती बताया। इसके अलावा, 34 प्रतिशत कंपनियों ने बदलाव के प्रति कर्मचारियों के प्रतिरोध को एक बड़ी समस्या के रूप में गिनाया।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए कंपनियां भी काफी सक्रिय हैं। कर्मचारियों को नए कौशल सिखाने के लिए 61 प्रतिशत संगठन अपस्किलिंग और रीस्किलिंग कार्यक्रम चला रहे हैं। वहीं, निवेश की प्राथमिकताओं में सुरक्षा और अनुपालन नियंत्रण सबसे ऊपर हैं, जिन्हें 68 प्रतिशत कंपनियों ने बेहद महत्वपूर्ण माना है।

परिणामों को लेकर उम्मीदें भी काफी ऊंची हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 97 प्रतिशत कंपनियों को उत्पादकता में सुधार की उम्मीद है। डेलॉइट इंडिया के भागीदार एस अंजनी कुमार के अनुसार, भारतीय उद्यम अपनी एआई यात्रा के एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर रहे हैं, जहां महत्वाकांक्षा अब वास्तविक क्रियान्वयन में बदल रही है।

कुल मिलाकर, ये दोनों रिपोर्ट एक स्पष्ट तस्वीर पेश करती हैं। भारत न केवल एआई प्रतिभा का एक बड़ा केंद्र बन रहा है, बल्कि इसकी कंपनियां भी इस तकनीक को तेजी से अपना रही हैं। कौशल, पैमाने और तकनीक के इस संगम पर खड़ा भारत, आने वाले वर्षों में वैश्विक एआई अर्थव्यवस्था में एक अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार दिखता है।

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