Rohan VermaVIEW PROFILE →
भारत का इंडियाAI मिशन 2026: 10,372 करोड़ रुपये और 38,000 GPU के साथ एआई क्रांति
भारत सरकार का इंडियाAI मिशन 2026 में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 10,372 करोड़ रुपये के बजट, 38,000 से अधिक GPU और सात स्तंभों के साथ यह मिशन स्वदेशी एआई मॉडल, सस्ती कंप्यूटिंग, कौशल विकास और स्टार्टअप समर्थन पर केंद्रित है, जिससे भारत वैश्विक एआई क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति बन रहा है।
भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के क्षेत्र में तेजी से एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है। इस दिशा में सरकार का सबसे महत्वाकांक्षी कदम इंडियाAI मिशन है, जो 2026 में तेज गति से आगे बढ़ रहा है। यह मिशन देश में सस्ती कंप्यूटिंग, स्वदेशी मॉडल और कुशल कार्यबल तैयार करने पर केंद्रित है।
मिशन का बजट और सात स्तंभ
इंडियाAI मिशन को मार्च 2024 में मंजूरी दी गई थी और इसका कुल बजट लगभग 10,372 करोड़ रुपये यानी करीब 1.25 अरब डॉलर है। यह मिशन 2026 तक चरणबद्ध तरीके से विस्तारित हो रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और अग्रणी बनाना है।
यह पूरा मिशन सात प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। इनमें सस्ती कंप्यूटिंग तक पहुंच, अनुप्रयोगों का विकास, AIKosh डेटासेट मंच, स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल, भविष्य के कौशल, स्टार्टअप के लिए वित्तपोषण और जिम्मेदार एआई शासन शामिल हैं। ये सभी स्तंभ मिलकर एक मजबूत एआई पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करते हैं।
कंप्यूट और GPU अवसंरचना
मिशन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कंप्यूटिंग अवसंरचना है, जिसके लिए लगभग 4,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके तहत 38,000 से अधिक GPU को एआई कंप्यूट पोर्टल के माध्यम से जोड़ा गया है, जो शुरुआती लक्ष्य 10,000 से कहीं अधिक है। ये संसाधन स्टार्टअप और शोध संस्थानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इन GPU को बेहद किफायती दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। भारत में इनकी दर लगभग 65 रुपये प्रति घंटा है, जबकि वाणिज्यिक क्लाउड सेवाओं पर यही दर कहीं अधिक होती है। इस तरह यह वैश्विक कीमतों की तुलना में लगभग 60 से 70 प्रतिशत तक सस्ता है, जिसमें एनवीडिया के H100 और H200 जैसे उन्नत चिप शामिल हैं।
इस अवसंरचना को खड़ा करने में कई बड़ी कंपनियां शामिल हैं। इनमें जियो, टाटा, योट्टा और CtrlS जैसे प्रमुख नाम हैं, जो देश भर में कंप्यूटिंग क्षमता प्रदान कर रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में GPU की उपलब्धता भारत को एआई अनुसंधान और विकास के लिए एक ठोस आधार प्रदान करती है।
स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल

मिशन का एक प्रमुख लक्ष्य भारत के अपने स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल विकसित करना है, जिसके लिए लगभग 1,500 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इस दिशा में सर्वम एआई को पहली टीम के रूप में चुना गया है, जिसे लगभग 4,000 GPU तक सब्सिडी वाली पहुंच दी जा रही है। यह भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है।
सर्वम एआई के अलावा कम से कम पांच और टीमों को भी चुना गया है। इन टीमों का लक्ष्य ऐसे मॉडल बनाना है जो भारत की 22 आधिकारिक भाषाओं में पारंगत हों। यह पहल सुनिश्चित करेगी कि एआई तकनीक देश की भाषाई विविधता को ध्यान में रखे और इसका लाभ हर नागरिक तक पहुंच सके।
AIKosh और अनुप्रयोग
डेटा और संसाधनों को सुलभ बनाने के लिए AIKosh मंच की स्थापना की गई है। इस मंच पर वर्तमान में 3,000 से अधिक डेटासेट और 243 एआई मॉडल उपलब्ध हैं। यह मंच शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और संस्थानों के लिए एआई विकास के संसाधनों को खुले तौर पर उपलब्ध कराता है, जिससे देश में नवाचार को बढ़ावा मिलता है।
इसके साथ ही अनुप्रयोगों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसके लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। अब तक भारत की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए 30 से अधिक एआई अनुप्रयोगों को मंजूरी दी जा चुकी है, जो विभिन्न क्षेत्रों में इस तकनीक के व्यावहारिक उपयोग को दर्शाते हैं।
कौशल, स्टार्टअप और उद्यम
भविष्य के लिए कुशल कार्यबल तैयार करना भी मिशन की प्राथमिकता है। इंडियाAI फ्यूचरस्किल्स कार्यक्रम के तहत 13,500 से अधिक विद्यार्थियों को समर्थन दिया गया है, जिनमें स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी शोधकर्ता शामिल हैं। इसके अलावा जुलाई 2025 तक टियर 2 और टियर 3 शहरों में 27 एआई और डेटा लैब चालू हो चुकी थीं।
भारत का एआई प्रतिभा पूल तेजी से बढ़ रहा है और इसके 2027 तक दोगुना होकर लगभग 12.5 लाख पेशेवरों तक पहुंचने की उम्मीद है। एक रिपोर्ट के अनुसार देश की 87 प्रतिशत कंपनियां सक्रिय रूप से एआई समाधानों का उपयोग कर रही हैं, और भारत एआई कौशल, क्षमताओं तथा नीतियों में शीर्ष चार देशों में शामिल है।
स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए भी मिशन के तहत लगभग 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त सरकार ने घरेलू वेंचर कैपिटल फंडों के लिए 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की फंड ऑफ फंड्स प्रतिबद्धता जताई है, जिससे नवोदित एआई कंपनियों को आवश्यक पूंजी और समर्थन मिल सकेगा।
डेटा सुरक्षा और वैश्विक शिखर सम्मेलन
डेटा सुरक्षा को लेकर भारत ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन यानी DPDP अधिनियम के नियमों को 2025 में अंतिम रूप दिया, जिसमें प्रति उल्लंघन 250 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। वहीं फरवरी 2026 में आयोजित होने वाले इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में 30 से अधिक देशों के 300 से अधिक प्रदर्शक भाग लेंगे।
कुल मिलाकर, इंडियाAI मिशन भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता बनाने की दिशा में एक व्यापक और महत्वाकांक्षी प्रयास है। सस्ती कंप्यूटिंग, स्वदेशी मॉडल, कौशल विकास और मजबूत डेटा शासन के संयोजन से भारत आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में अपनी स्थिति और अधिक मजबूत करेगा। यह जानकारी सरकारी स्रोतों और उद्योग रिपोर्टों पर आधारित है।





