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मॉडल और चिप के सपने छोड़ क्लाउड की ओर: भारत के पहले AI यूनिकॉर्न Krutrim की नई राह
ओला के भाविश अग्रवाल का Krutrim कभी अपने खुद के फाउंडेशन मॉडल और चिप बनाने का सपना देखता था. 2026 में कंपनी ने ये महत्वाकांक्षाएं छोड़, बड़ी छंटनी के बीच खुद को AI क्लाउड कारोबार में समेट लिया है.
भारत के सबसे तेज़ बने यूनिकॉर्न में से एक की कहानी ने बड़ा मोड़ ले लिया है. ओला के संस्थापक भाविश अग्रवाल का एआई स्टार्टअप Krutrim, जो कभी अपने खुद के फाउंडेशन मॉडल और सेमीकंडक्टर चिप बनाने का दावा करता था, अब इन महत्वाकांक्षाओं से पीछे हटकर मुख्य रूप से एआई क्लाउड कारोबार पर केंद्रित हो गया है.
कंपनी की शुरुआत बेहद तेज़ रही थी. जनवरी 2024 में, केवल 5 करोड़ डॉलर की सीरीज़ ए फंडिंग के साथ, Krutrim का मूल्यांकन एक अरब डॉलर के पार पहुंच गया और यह भारत का सबसे तेज़ बनने वाला यूनिकॉर्न कहलाया. इस राउंड का नेतृत्व मैट्रिक्स पार्टनर्स इंडिया ने किया था.
भाविश अग्रवाल ने इस सपने के पीछे बहुत बड़ा दांव लगाया था. फरवरी 2025 में उन्होंने 2,000 करोड़ रुपये की निजी पूंजी लगाने और कुल मिलाकर 10,000 करोड़ रुपये तक के निवेश का वादा किया. कंपनी को कुल करीब 23 करोड़ डॉलर की प्रतिबद्ध फंडिंग हासिल थी.
सपने जो छोड़ दिए गए

शुरुआत में Krutrim ने एक व्यापक स्वदेशी एआई तंत्र की कल्पना की थी, जिसमें अपने फाउंडेशन मॉडल और अपनी चिप, दोनों शामिल थे. मगर ये योजनाएं धीरे-धीरे किनारे कर दी गईं. कंपनी ने 2026 में लॉन्च होने वाली अपनी कस्टम चिप, बोधि 1, को पूरी तरह रद्द कर दिया.
उपभोक्ताओं के लिए बनाया गया इसका एआई असिस्टेंट Kruti भी बंद कर दिया गया. अप्रैल 2026 में इस ऐप को बिना किसी सार्वजनिक घोषणा के चुपचाप ऐप स्टोर से हटा लिया गया, जो कंपनी की पूरी तरह बदल चुकी दिशा का साफ संकेत था.
इस बदलाव की सबसे भारी कीमत कर्मचारियों ने चुकाई. अगस्त 2025 में जहां Krutrim में 550 से अधिक लोग काम करते थे, वहीं मार्च 2026 तक यह संख्या घटकर लगभग 150 से 160 रह गई. तीन दौर की छंटनी में 200 से ज़्यादा पद खत्म किए गए, खासकर भाषा विज्ञान, एआई रिसर्च और चिप डिज़ाइन टीमों में.
छंटनी के साथ-साथ वरिष्ठ नेतृत्व भी कंपनी छोड़ता गया. एआई के संस्थापक प्रमुख चंद्र खत्री सहित कई अहम अधिकारियों और बोधि चिप परियोजना के इंजीनियरों ने विदाई ले ली, जिससे कंपनी की मूल तकनीकी क्षमता पर सीधा असर पड़ा.
क्लाउड की ओर नया दांव
नई रणनीति के तहत Krutrim ने खुद को एक पूर्ण स्वदेशी एआई क्लाउड प्रदाता के रूप में ढाल लिया है, जो मुख्य रूप से उद्यमों यानी बड़े कारोबारों को सेवाएं देता है. इसके प्रमुख उत्पादों में अब Krutrim Cloud और मैप्स जैसी सेवाएं शामिल हैं.
कंपनी का दावा है कि अब उसके पास 25 से अधिक एंटरप्राइज़ ग्राहक हैं, जो दूरसंचार, वित्तीय सेवाओं, स्वास्थ्य, लॉजिस्टिक्स और कंज़्यूमर इंटरनेट जैसे क्षेत्रों से आते हैं. रिपोर्टों के अनुसार, इसकी अधिकांश जीपीयू क्षमता पहले से ही बाहरी ग्राहकों के कामों में लगी हुई है.
पहला मुनाफ़ा, पर सवाल बाकी
इस पूरे पुनर्गठन का असर आंकड़ों में भी दिखा. वित्त वर्ष 2026 में Krutrim ने करीब 300 करोड़ रुपये, यानी लगभग 3.15 करोड़ डॉलर का राजस्व दर्ज किया, जो पिछले साल से लगभग तीन गुना है. कंपनी ने पहली बार सालाना शुद्ध मुनाफ़ा कमाया, जिसका मार्जिन 10 प्रतिशत से ऊपर रहा.
हालांकि इन आंकड़ों को सतर्कता से देखने की ज़रूरत है. पहले की रिपोर्टों के अनुसार, बीते वित्त वर्ष में कंपनी के राजस्व का बड़ा हिस्सा ओला समूह की ही कंपनियों से आया था, जिससे खुले बाज़ार में इसकी असली पकड़ पर सवाल अब भी बने हुए हैं.
Krutrim की कहानी भारत के एआई सपने की एक बड़ी सीख भी है. एक ओर सरकार और बड़ी कंपनियां स्वदेशी मॉडल और कंप्यूट क्षमता में भारी निवेश कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर फाउंडेशन मॉडल और चिप बनाना बेहद महंगा और जोखिम भरा साबित हो रहा है, यहां तक कि सबसे तेज़ यूनिकॉर्न के लिए भी.
आगे का रास्ता Krutrim के लिए आसान नहीं होगा. उसे यह साबित करना होगा कि वह क्लाउड कारोबार में वैश्विक दिग्गजों और घरेलू प्रतिस्पर्धियों के बीच टिक सकती है. फ़िलहाल, एक महत्वाकांक्षी मॉडल कंपनी से एक व्यावहारिक क्लाउड कंपनी में इसका यह बदलाव भारतीय एआई उद्योग के लिए एक अहम संकेत है.





