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भारत ने पेश किए तीन स्वदेशी एआई मॉडल, वैश्विक तकनीकी दिग्गजों को टक्कर देने की तैयारी
फरवरी 2026 में दिल्ली में आयोजित एआई समिट में भारत ने तीन संप्रभु एआई मॉडल पेश किए। सर्वम, ज्ञानी और भारतजेन द्वारा बनाए गए ये मॉडल 22 भारतीय भाषाओं का समर्थन करते हैं।
भारत ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगाते हुए अपने तीन स्वदेशी एआई मॉडल पेश किए हैं। ये मॉडल इस बात का प्रमाण हैं कि देश अब केवल विदेशी तकनीक का उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि इस क्षेत्र में खुद का निर्माता बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, और वैश्विक दिग्गजों को टक्कर देने को तैयार है।
दिल्ली में हुआ अनावरण
इन मॉडलों का अनावरण 20 फरवरी 2026 को दिल्ली में आयोजित एक एआई समिट के दौरान किया गया। यह पहल इंडियाएआई मिशन के तहत की गई है, जिसे साल 2024 में शुरू किया गया था और जिसके लिए कुल 10,000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में मजबूत स्वदेशी एआई क्षमता का निर्माण करना है।
इन तीनों मॉडलों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये देश की 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं का समर्थन करते हैं। यह विशेषता उन्हें भारत की विविधतापूर्ण आबादी के लिए बेहद उपयोगी बनाती है, क्योंकि इससे तकनीक का लाभ अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले करोड़ों लोगों तक आसानी से पहुंच सकता है।
सर्वम के दो शक्तिशाली मॉडल

पहला मॉडल बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप सर्वम एआई द्वारा बनाया गया है, जिसने दो अलग-अलग बड़े भाषा मॉडल पेश किए। इनमें से एक का नाम विक्रम है, जो 30 अरब पैरामीटर वाला मॉडल है और वास्तविक समय की बातचीत के लिए बनाया गया है। इसमें 32,000 टोकन की संदर्भ क्षमता मौजूद है।
सर्वम का दूसरा मॉडल और भी अधिक शक्तिशाली है। यह 105 अरब पैरामीटर वाला मॉडल है, जिसे जटिल और गहन तर्क वाले कार्यों के लिए तैयार किया गया है। इसमें 128,000 टोकन की विशाल संदर्भ क्षमता है। खास बात यह है कि इन दोनों मॉडलों का निर्माण पूरी तरह भारत में ही किया गया है।
सर्वम ने अपने मॉडलों के कई संस्करण भी पेश किए हैं, जिनमें सर्वम-लार्ज, सर्वम-स्मॉल और सर्वम-एज शामिल हैं। इनमें से सर्वम-एज को ऑफलाइन इस्तेमाल के लिए बनाया गया है। कंपनी ने इन्हें एपीआई के जरिए उपलब्ध कराया है और सरकारी संस्था यूआईडीएआई के साथ साझेदारी भी की है।
ज्ञानी की आवाज तकनीक
दूसरा मॉडल ज्ञानी डॉट एआई कंपनी की ओर से आया है, जो विशेष रूप से आवाज आधारित तकनीक पर केंद्रित है। कंपनी के वचन नामक उत्पाद टेक्स्ट को आवाज में और आवाज को टेक्स्ट में बदलने का काम करते हैं। समिट से पहले ही यह प्रणाली प्रतिदिन एक करोड़ कॉल को संभाल रही थी।
इस तकनीक की क्षमताएं वाकई प्रभावशाली हैं। यह मात्र 10 सेकंड से कम की ऑडियो का उपयोग करके 12 भाषाओं में आवाज की नकल यानी वॉयस क्लोनिंग कर सकती है। इसके अलावा, आवाज को टेक्स्ट में बदलने वाली प्रणाली को 1,000 से अधिक क्षेत्रों की 10 लाख घंटे से भी ज्यादा की ऑडियो पर प्रशिक्षित किया गया है।
भारतजेन और सबसे बड़ी फंडिंग
तीसरा मॉडल भारतजेन द्वारा विकसित किया गया है, जिसे सरकार से मिली सबसे बड़ी एकल एआई फंडिंग का श्रेय जाता है। इस परियोजना को 900 करोड़ रुपये का वित्तपोषण प्राप्त हुआ है। इसका नेतृत्व आईआईटी बॉम्बे कर रहा है और इसमें प्रसिद्ध कंपनी एनवीडिया का सहयोग भी शामिल है।
भारतजेन का मॉडल परम-2 नाम से जाना जाता है, जो 17 अरब पैरामीटर वाला है और एक विशेष वास्तुकला पर आधारित है, जिसे मिक्सचर ऑफ एक्सपर्ट्स कहा जाता है। इस मॉडल को शासन, रक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है।
भारतजेन ने अपने मॉडल को खुले तौर पर जारी करने का रास्ता चुना है। इसे हगिंग फेस नामक मंच पर पूरे दस्तावेजीकरण के साथ उपलब्ध कराया गया है। इस खुली पहुंच से शोधकर्ता और डेवलपर इस मॉडल का स्वतंत्र रूप से उपयोग कर सकेंगे, जिससे देश में नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
वैश्विक सराहना
भारत के इन प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा जा रहा है। गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदर पिचाई ने भारतीय डेवलपर्स की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत में उन्हें जो डेवलपर ऊर्जा दिखती है, वह किसी से कम नहीं है। यह टिप्पणी देश की लगातार बढ़ती तकनीकी क्षमता को दर्शाती है।
कुल मिलाकर, इन तीन स्वदेशी मॉडलों का अनावरण भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारतीय भाषाओं पर केंद्रित, देश में ही निर्मित और विभिन्न क्षेत्रों के लिए उपयोगी ये मॉडल दिखाते हैं कि भारत संप्रभु एआई की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रहा है। आने वाला समय बताएगा कि ये मॉडल किस हद तक वैश्विक दिग्गजों को चुनौती दे पाते हैं।





