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एजेंटिक एआई की लहर: कैसे TCS, Infosys और Wipro भारत की आईटी को डिजिटल वर्कफोर्स में बदल रहे हैं
भारत का आईटी उद्योग अब प्रयोगों से आगे बढ़कर एआई एजेंट्स को असली काम पर लगा रहा है। TCS, Infosys और Wipro जैसे दिग्गज लाखों कर्मचारियों और हजारों स्वायत्त एजेंट्स के साथ काम करने का तरीका बदल रहे हैं। जानिए इस मौन क्रांति की पूरी तस्वीर।
भारत की तकनीकी दुनिया में एक मौन लेकिन गहरी क्रांति चल रही है। अब तक जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल प्रयोगशालाओं और पायलट परियोजनाओं तक सीमित थी, वह अब दफ्तरों के रोज़मर्रा के कामकाज का हिस्सा बन रही है। देश का विशाल आईटी उद्योग प्रयोग के दौर से निकलकर एजेंटिक एआई को असली ज़िम्मेदारियाँ सौंप रहा है।
प्रयोग से मुख्यधारा तक का सफर
भारत का लगभग तीन सौ अरब डॉलर का आईटी सेवा क्षेत्र इस बदलाव के केंद्र में है। TCS, Infosys और Wipro जैसी दिग्गज कंपनियाँ अब एआई को केवल आजमाने के बजाय अपने मूल कामकाज में गहराई से जोड़ रही हैं। यह बदलाव केवल तकनीक का नहीं, बल्कि काम करने की पूरी संस्कृति का है जो तेज़ी से नया रूप ले रही है।
एजेंटिक एआई का मतलब है ऐसे स्वायत्त सॉफ्टवेयर एजेंट जो केवल सवालों के जवाब नहीं देते, बल्कि खुद निर्णय लेकर बहु-चरणीय कार्यों को अंजाम तक पहुँचाते हैं। ये एजेंट सॉफ्टवेयर विकास, परीक्षण और ग्राहक सेवा जैसी प्रक्रियाओं में इंसानों के साथ मिलकर काम करते हैं और उन्हें एक तरह की डिजिटल कार्यशक्ति में बदल देते हैं।

दिग्गज कंपनियों के ठोस आँकड़े
इस बदलाव की गति कंपनियों के आँकड़ों में साफ झलकती है। TCS ने अपने एक लाख से अधिक कर्मचारियों को माइक्रोसॉफ्ट 365 कोपायलट से लैस किया है, ताकि रोज़मर्रा की उत्पादकता बढ़े, सहयोग बेहतर हो और निर्णय अधिक बुद्धिमानी से लिए जा सकें। कंपनी ने कुछ चुनिंदा कार्यों में काम पूरा होने के समय में पैंतीस प्रतिशत तक की कमी दर्ज की है।
Wipro की उपलब्धियाँ भी कम प्रभावशाली नहीं हैं। कंपनी के अनुसार वह हर तिमाही में ढाई लाख से अधिक पूर्णकालिक कर्मचारी-दिवसों की बचत कर रही है। इससे भी उल्लेखनीय यह है कि उसके कर्मचारियों ने मिलकर उनतीस हजार से अधिक अपने विशेष एआई एजेंट तैयार किए हैं, जो अलग-अलग कामों के लिए ढाले गए हैं।
Infosys ने भी इस दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए हैं। कंपनी अपने तैनात उपयोगकर्ताओं में एआई उपकरणों के लिए इक्यानबे प्रतिशत मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता दर बनाए हुए है, जो दर्शाता है कि कर्मचारी इन्हें केवल आज़मा नहीं रहे, बल्कि नियमित रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके लिए कंपनी ने एक समर्पित एजेंटिक एआई फाउंड्री भी शुरू की है।
बाजार की व्यापक तस्वीर
यह बदलाव केवल तीन बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे भारतीय उद्योग जगत में फैल रहा है। डेलॉइट की एक रिपोर्ट के अनुसार अस्सी प्रतिशत से अधिक भारतीय संगठन इस समय स्वायत्त एजेंट विकसित करने की सक्रिय रूप से खोज कर रहे हैं। यह आँकड़ा दिखाता है कि एजेंटिक एआई अब किसी एक क्षेत्र की नहीं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था की प्राथमिकता बन गई है।
आईडीसी और यूआईपाथ के एक अध्ययन का अनुमान है कि नब्बे प्रतिशत से अधिक भारतीय संगठन इस वर्ष के भीतर एआई एजेंट्स को तैनात कर देंगे। वहीं ईवाई की एक रिपोर्ट बताती है कि चौबीस प्रतिशत उद्योग जगत के नेता पहले ही एजेंटिक एआई को लागू कर चुके हैं, जबकि इक्यानबे प्रतिशत इसे तेज़ी से अपनाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं।
इन सभी आँकड़ों के पीछे एक बड़ा आर्थिक अवसर भी छिपा है। Infosys का मानना है कि वर्ष दो हजार तीस तक एआई-प्रथम सेवाओं का बाजार तीन सौ से चार सौ अरब डॉलर तक पहुँच सकता है। यह भारत के आईटी उद्योग के लिए एक नई विकास गाथा की नींव रख सकता है, बशर्ते कंपनियाँ इस लहर पर सवार होने में सफल रहें।
अवसर और चुनौतियाँ साथ-साथ
इतनी तेज़ रफ्तार के बीच सवाल स्वाभाविक रूप से उठते हैं कि इसका कर्मचारियों पर क्या असर होगा। जब एजेंट कई दोहराव वाले काम खुद संभालने लगेंगे, तो कार्यबल की भूमिका बदलनी तय है। विशेषज्ञ मानते हैं कि नौकरियाँ खत्म होने के बजाय उनका स्वरूप बदलेगा और कर्मचारियों को इन एजेंट्स के साथ काम करने के नए कौशल सीखने होंगे।
इसके अलावा भरोसे, सुरक्षा और जवाबदेही से जुड़े प्रश्न भी उतने ही अहम हैं। जब स्वायत्त एजेंट अपने आप निर्णय लेने लगते हैं, तो यह सुनिश्चित करना ज़रूरी हो जाता है कि वे गलती न करें और संवेदनशील डेटा सुरक्षित रहे। कंपनियों को नवाचार की गति और जोखिम के प्रबंधन के बीच एक नाज़ुक संतुलन बनाना होगा।
फिर भी समग्र तस्वीर भारत के लिए बेहद उत्साहजनक है। विशाल तकनीकी प्रतिभा, मजबूत आईटी उद्योग और तेज़ी से अपनाने की भूख के साथ देश खुद को एजेंटिक एआई के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की ओर बढ़ रहा है। आने वाले वर्ष तय करेंगे कि यह मौन क्रांति भारत की डिजिटल कहानी को कितनी दूर तक ले जाती है।






