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एक लाख करोड़ पैरामीटर का सपना: IIT बॉम्बे कैसे भारत का सबसे बड़ा एआई मॉडल बनाएगा
सर्वम के मॉडल्स के बाद अब भारत की नज़र और भी बड़े लक्ष्य पर है। IIT बॉम्बे की अगुवाई में एक ट्रिलियन पैरामीटर वाला स्वदेशी भाषा मॉडल बनाने की तैयारी, और देशभर में 500 डेटा लैब।
भारत के स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सफर में अब तक ज़्यादातर चर्चा सर्वम जैसे स्टार्टअप्स और उनके शुरुआती भाषा मॉडलों के इर्द-गिर्द रही है। लेकिन इस पूरी कहानी का अगला अध्याय कहीं ज़्यादा महत्वाकांक्षी है, और इसकी अगुवाई देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में से एक करने जा रहा है।
एक ट्रिलियन पैरामीटर का लक्ष्य
इंडियाएआई मिशन के तहत सरकार ने IIT बॉम्बे की अगुवाई वाले एक कंसोर्टियम को लगभग 988.6 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिसका उद्देश्य एक ऐसा विशाल भाषा मॉडल तैयार करना है जिसमें पूरे एक ट्रिलियन यानी दस खरब पैरामीटर होंगे। यह आंकड़ा अपने आप में इस परियोजना की भव्यता को बयान करता है।
पैरामीटर किसी भी एआई मॉडल की जटिलता और क्षमता का पैमाना माने जाते हैं, और जितने अधिक पैरामीटर होते हैं, मॉडल उतनी ही बारीकी से भाषा और संदर्भ को समझ सकता है। एक ट्रिलियन पैरामीटर तक पहुँचने का लक्ष्य भारत को दुनिया के सबसे बड़े और सक्षम एआई मॉडलों की श्रेणी में खड़ा करने की कोशिश है।

यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि अब तक इस स्तर के मॉडल मुख्य रूप से चंद वैश्विक तकनीकी दिग्गजों के पास ही रहे हैं। अगर यह परियोजना सफल होती है, तो भारत न सिर्फ़ तकनीक का उपभोक्ता बल्कि इस अत्याधुनिक क्षेत्र में एक असली निर्माता के रूप में अपनी जगह मज़बूत कर सकेगा।
सर्वम से आगे की छलांग
यह महत्वाकांक्षा शून्य से नहीं उठी है, बल्कि इसके पीछे एक ठोस नींव है। इसी वर्ष फ़रवरी में सर्वम ने इंडियाएआई मिशन के कंप्यूट पर पूरी तरह प्रशिक्षित दो फाउंडेशन मॉडल ओपन-सोर्स किए थे, जिनमें सर्वम 30B नामक मॉडल एक बत्तीस अरब पैरामीटर वाला मिक्सचर-ऑफ-एक्सपर्ट्स सिस्टम है।
इस तरह के मॉडल भारत के लिए एक अहम सीख साबित हुए हैं, क्योंकि इन्होंने दिखाया कि देश के भीतर उपलब्ध संसाधनों और कंप्यूट के दम पर गंभीर स्तर के एआई मॉडल बनाए जा सकते हैं। ट्रिलियन-पैरामीटर वाली परियोजना इसी अनुभव और आत्मविश्वास पर आगे बढ़ने की एक स्वाभाविक अगली कड़ी है।
IIT बॉम्बे जैसे संस्थान की अगुवाई इस बात का भी संकेत है कि भारत अपने अकादमिक और अनुसंधान तंत्र को इस मिशन का केंद्र बना रहा है। कंसोर्टियम मॉडल का मतलब है कि कई विशेषज्ञ, संस्थान और संसाधन मिलकर एक साझा लक्ष्य की दिशा में काम करेंगे, जिससे परियोजना को व्यापक ताक़त मिलती है।
देशभर में फैलती बुनियाद
बड़े मॉडल केवल कोड और एल्गोरिद्म से नहीं बनते, इनके लिए एक व्यापक बुनियादी ढांचे की ज़रूरत होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए इंडियाएआई मिशन के तहत देशभर में पाँच सौ से अधिक डेटा लैब स्थापित करने की योजना है, जो प्रशिक्षण, प्रयोग और नवाचार का आधार बनेंगी।
ये डेटा लैब न केवल शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को संसाधन उपलब्ध कराएँगी, बल्कि छोटे शहरों और उभरते प्रतिभाशाली युवाओं तक भी एआई की पहुँच बढ़ाएँगी। इस तरह यह पहल तकनीक को कुछ बड़े केंद्रों तक सीमित रखने के बजाय उसे पूरे देश में फैलाने की कोशिश करती है।
इसके साथ ही मिशन का कंप्यूट आधार भी लगातार मज़बूत हो रहा है। हज़ारों जीपीयू की उपलब्धता और उन्हें रियायती दरों पर डेवलपर्स तक पहुँचाने की व्यवस्था इस बात की गारंटी देती है कि ट्रिलियन-पैरामीटर जैसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य के लिए ज़रूरी प्रोसेसिंग शक्ति देश के भीतर ही मौजूद रहेगी।
चुनौतियाँ और आगे का रास्ता
इतनी बड़ी परियोजना अपने साथ बड़ी चुनौतियाँ भी लेकर आती है। एक ट्रिलियन पैरामीटर वाला मॉडल बनाना केवल पैसे और मशीनों का मामला नहीं है, बल्कि इसके लिए उच्च गुणवत्ता के डेटा, कुशल प्रतिभा और लंबे समय तक निरंतर प्रयास की भी आवश्यकता होती है, जो किसी भी देश के लिए आसान नहीं है।
भारत के लिए असली परीक्षा यह होगी कि वह इन घोषणाओं और आवंटनों को ज़मीनी नतीजों में कितनी तेज़ी से बदल पाता है। तकनीकी दुनिया में गति बहुत मायने रखती है, और वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के साथ कदम मिलाकर चलने के लिए योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन बेहद ज़रूरी होगा।
फिर भी, दिशा साफ़ है। सर्वम के मॉडलों से लेकर IIT बॉम्बे की ट्रिलियन-पैरामीटर परियोजना और देशभर की डेटा लैब तक, भारत एक ऐसा भविष्य गढ़ने की कोशिश कर रहा है जिसमें वह एआई का सिर्फ़ इस्तेमाल न करे, बल्कि इसे अपनी शर्तों और अपनी भाषाओं में खुद रचे।






