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एआई बदल रहा है भारत की आईटी दुनिया: नौकरियां घट रहीं, पर उद्योग की कमाई बढ़ रही है
टीसीएस और इंफोसिस जैसी दिग्गज कंपनियों में नौकरियों में कटौती हो रही है, फिर भी भारत का आईटी उद्योग बढ़ रहा है, क्योंकि एआई पारंपरिक कामों की जगह ले रहा है और नई भूमिकाएं गढ़ रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारत की आईटी सेवा इंडस्ट्री को गहराई से बदल रहा है, और यह वही क्षेत्र है जो दशकों से देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है तथा लाखों युवाओं को मध्यवर्गीय जीवन का रास्ता देता आया है।
बदलाव का सबसे साफ संकेत नौकरियों के आंकड़ों में दिखता है, क्योंकि वित्त वर्ष 2026 में अकेले टीसीएस ने लगभग तेईस हजार से अधिक पदों में कटौती की, जबकि इंफोसिस ने चौथी तिमाही में ही करीब आठ हजार चार सौ चालीस कर्मचारियों को खोया।
नौकरियां घटीं, पर उद्योग बढ़ा

हालांकि पूरी तस्वीर इतनी सीधी नहीं है, क्योंकि नैसकॉम के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में उद्योग की आय 6.1 प्रतिशत बढ़कर 315 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जो कर्मचारियों की संख्या में हुई 2.3 प्रतिशत की वृद्धि से कहीं तेज है।
इसका मतलब यह है कि कुल मिलाकर उद्योग ने कर्मचारी जोड़े ही हैं और कुल संख्या करीब उनसठ लाख तक पहुंच गई, लेकिन असली कहानी संख्या में नहीं, बल्कि इस बात में है कि किस तरह के काम बढ़ रहे हैं और किस तरह के सिकुड़ रहे हैं।
कटौती मुख्य रूप से उन पारंपरिक आईटी भूमिकाओं में केंद्रित है जहां काम दोहराव वाला और प्रक्रिया-आधारित होता है, यानी ठीक वही काम जिन्हें अब एआई पहले से कहीं तेज और सस्ते तरीके से संभाल लेता है।
एआई का बढ़ता हिस्सा
एआई की बढ़ती भूमिका आय के आंकड़ों में भी झलकती है, क्योंकि इंफोसिस में वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही तक एआई से जुड़े काम का हिस्सा कुल आय का 8.2 प्रतिशत हो गया, और यह दहाई अंकों की रफ्तार से बढ़ रहा है।
नई मांग अब एआई, क्लाउड, डेटा और वैश्विक क्षमता केंद्रों यानी जीसीसी से जुड़ी भूमिकाओं में पैदा हो रही है, जहां कंपनियों को ऐसे लोगों की जरूरत है जो केवल कोड न लिखें, बल्कि एआई सिस्टम के साथ मिलकर काम कर सकें।
उद्योग के अनुमानों के अनुसार तकनीकी संगठनों में पहले से ही करीब बीस से चालीस प्रतिशत काम एआई-आधारित प्रणालियों की मदद से हो रहा है, जिससे यह साफ है कि बदलाव भविष्य की बात नहीं, बल्कि वर्तमान की सच्चाई है।
भूमिकाओं का नया आकार
नैसकॉम की चेयरपर्सन सिंधु गंगाधरन के अनुसार एआई का गहरा एकीकरण भूमिकाओं को मौलिक रूप से नए सिरे से गढ़ेगा, और ध्यान अब ऐसी टीमों पर जाएगा जो मानव कर्मचारियों को एआई के साथ जोड़कर काम करती हैं।
इसका सीधा असर कौशल पर पड़ता है, क्योंकि जिस गति से एआई-सहायित सॉफ्टवेयर विकास आम हो रहा है, उसमें केवल वही पेशेवर टिक पाएंगे जो लगातार खुद को नए हुनर से लैस करते रहेंगे और मशीनों के साथ तालमेल बिठा पाएंगे।
आगे की राह
नैसकॉम के अध्यक्ष राजेश नांबियार ने फरवरी 2026 के मंच पर इस तनाव को स्वीकार भी किया और आय तथा रोजगार की वृद्धि के बीच बढ़ती हुई खाई की ओर इशारा किया, जो आने वाले वर्षों में उद्योग की सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है।
कुल मिलाकर, भारत के आईटी उद्योग के सामने असली सवाल यह नहीं है कि एआई नौकरियां छीनेगा या नहीं, बल्कि यह है कि क्या देश अपने विशाल कार्यबल को समय रहते नए कौशल देकर मूल्य श्रृंखला में ऊपर ले जा पाएगा।






